कोर वोटर, नाराज कार्यकर्ता और कमजोर सीटें… 2027 फतह के लिए बीजेपी ने तैयार किया मास्टर प्लान
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और सरकार के स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली में हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में आगामी दो महीनों के लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार किया गया। बैठक में संगठन की मजबूती, नाराज कार्यकर्ताओं को जोड़ने, कोर वोट बैंक को मजबूत रखने और 2022 में हारी हुई विधानसभा सीटों पर विशेष रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
मानसून में विधायकों को क्षेत्र में रहने के निर्देश
बैठक में तय किया गया कि मानसून के दौरान सभी भाजपा विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे। आपदा, सड़क, पेयजल और अन्य जनसमस्याओं की स्थिति में विधायकों को मौके पर मौजूद रहकर लोगों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है। चुनाव के दौरान किए गए स्थानीय वादों को पूरा कराने के लिए विधायक मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ सीधे समन्वय बनाए रखेंगे।
कोर वोट बैंक पर विशेष फोकस
भाजपा नेतृत्व ने पार्टी के पारंपरिक और कोर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया। बैठक में उन पुराने कार्यकर्ताओं तक दोबारा पहुंच बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई, जो किसी कारणवश संगठन में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। आगामी दो महीनों के संगठनात्मक कार्यक्रमों में ऐसे कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विधायकों की सक्रियता पर संघ की भी नजर
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ बेहतर समन्वय को लेकर भी चर्चा हुई। संघ पदाधिकारियों की ओर से जनप्रतिनिधियों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिक समय देने और लगातार जनसंपर्क बनाए रखने पर जोर दिया गया। संगठन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता के जरिए जनता के साथ संवाद और विश्वास को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है।
जातीय समीकरणों से आगे सामाजिक वर्गों पर नजर
2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की योजना बनाई है। महिलाओं, युवाओं, पूर्व सैनिकों और अन्य वर्गों के बीच विशेष संपर्क अभियान चलाने पर जोर दिया जाएगा। पार्टी की रणनीति केवल जातिगत समीकरणों तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक आधार को मजबूत करने की है।
अग्निवीरों के लिए रोजगार और स्वरोजगार की तैयारी
बैठक में अग्निवीर योजना के पहले बैच के सेवा पूरी कर लौटने को लेकर भी चर्चा हुई। सितंबर से लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार और संगठन मिलकर योजना तैयार करेंगे। इसके लिए अग्निवीर सेल के माध्यम से कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया है।
2022 में हारी 23 सीटों पर विशेष रणनीति
भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में जिन 23 सीटों पर जीत हासिल नहीं की थी, उन्हें आगामी चुनाव के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा है। इन सीटों पर अगले छह महीनों तक संगठन विशेष सक्रियता के साथ काम करेगा। वरिष्ठ नेताओं के नियमित प्रवास, सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व तैयार करने की रणनीति बनाई गई है।
इन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन जनस्वीकृति और जमीनी पकड़ के आधार पर मजबूत चेहरों की पहचान पर भी काम करेगा। पार्टी का लक्ष्य कमजोर मानी जाने वाली सीटों पर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत कर चुनाव से पहले मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना है।
सरकार-संगठन के बेहतर तालमेल पर जोर
भाजपा की इस रणनीति में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को अहम माना गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कोर वोट बैंक को मजबूत रखने, पुराने कार्यकर्ताओं को साथ जोड़ने, विधायकों की क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने और कमजोर सीटों पर लगातार काम करने से 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकती है।
यानी भाजपा का फोकस साफ है—कोर वोटर को साधना, नाराज कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ना और 2022 में हारी सीटों पर अगले छह महीने तक पूरी ताकत झोंकना।