मुंगरी कौथिग 2026: तोल्युड़ांडा में कुलदीप रावत व साथियों ने रखी नई पहल की नींव, मक्के की खेती को रोजगार से जोड़ने का प्रयास
रिखणीखाल। पौड़ी गढ़वाल के रिखणीखाल क्षेत्र के तोल्युड़ांडा गांव में 22 अगस्त 2026 को “मुंगरी कौथिग 2026” की अनोखी पहल की शुरुआत हुई। उत्तराखण्ड क्रांति दल (UKD) नेता कुलदीप रावत और उनके साथियों ने ग्रामीणों के सहयोग से इस आयोजन की शुरुआत मक्के की खेती को स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय का माध्यम बनाने के उद्देश्य से की। तोल्युड़ांडा लंबे समय से मक्के की पैदावार के लिए प्रसिद्ध है और यहां की मक्के की फसल दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहती है। आयोजकों का उद्देश्य स्थानीय कृषि, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मंच प्रदान करना है।

कुलदीप रावत ने कहा
“तोल्युड़ांडा की पहचान वर्षों से मक्के की खेती से रही है। यहां किसान मेहनत से मक्का पैदा करते हैं, लेकिन हमारी चिंता यह है कि इस मेहनत को ग्रामीणों की स्थायी आय और रोजगार से कैसे जोड़ा जाए। आज जरूरत है कि हम अपनी पारंपरिक फसलों को केवल घर की जरूरत तक सीमित न रखें, बल्कि उनके उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था विकसित करें। मुंगरी कौथिग उसी सोच की पहली कड़ी है। हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन केवल एक दिन का मेला न रहकर स्थानीय किसानों, युवाओं, महिलाओं और छोटे व्यवसायियों के लिए एक ऐसा मंच बने, जहां उन्हें अपने उत्पाद बेचने और नई संभावनाएं तलाशने का अवसर मिले। हमने यह भी तय किया है कि हर वर्ष 22 अगस्त को इसी क्षेत्र में मुंगरी कौथिग आयोजित किया जाएगा और इसे धीरे-धीरे और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।”

आयुष रावत ने कहा
“हमारे पहाड़ों में रोजगार की कमी की बात अक्सर होती है, लेकिन हमारे गांवों में ही ऐसी बहुत सी संभावनाएं मौजूद हैं जिन्हें सही दिशा और बाजार की जरूरत है। तोल्युड़ांडा का मक्का हमारी इसी स्थानीय क्षमता का उदाहरण है। मुंगरी कौथिग के माध्यम से हम चाहते हैं कि गांव के युवा अपनी कृषि और स्थानीय उत्पादों को सम्मान के साथ व्यवसाय से जोड़ने के बारे में सोचें। यह आयोजन केवल मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की सोच है। आने वाले समय में यदि किसान और स्थानीय लोग मिलकर मक्के से जुड़े उत्पाद तैयार करें और उन्हें बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाएं, तो निश्चित रूप से इससे गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।”
विनोद रावत ने कहा
“मुंगरी कौथिग की शुरुआत ग्रामीणों के सहयोग और उनकी भागीदारी से हुई है, इसलिए इसकी सबसे बड़ी ताकत भी गांव के लोग ही हैं। पहाड़ में हमारी पारंपरिक फसलें और स्थानीय उत्पाद हमारी पहचान का हिस्सा हैं, लेकिन कई बार बाजार और उचित मंच न मिलने के कारण इनका वह लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार हैं। हमारा प्रयास है कि इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय लोगों को एक ऐसा मंच मिले जहां वे अपनी उपज और हुनर को सामने ला सकें। यदि हम अपने गांव के उत्पादों को संगठित तरीके से बाजार से जोड़ने में सफल होते हैं तो यह केवल एक गांव के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आर्थिक गतिविधियों का नया रास्ता खोल सकता है।”

पहाड़ न्यूज़ 24 के संस्थापक संजीव नेगी ने कहा
“पहाड़ न्यूज़ 24 हमेशा से ग्रामीण क्षेत्रों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का प्रयास करता रहा है। मुंगरी कौथिग जैसी पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हमारी कृषि, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था तीनों को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। यदि किसी क्षेत्र की पहचान किसी विशेष फसल या उत्पाद से है तो उस पहचान को सिर्फ चर्चा तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार और व्यवसाय में बदलने की दिशा में काम होना चाहिए। इस आयोजन में सहयोग करना हमारे लिए भी एक सामाजिक जिम्मेदारी है। हमारी कोशिश रहेगी कि स्थानीय उत्पादों, ग्रामीणों की मेहनत और पहाड़ की संस्कृति को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि गांवों में होने वाली ऐसी सकारात्मक पहलों को व्यापक पहचान मिल सके।”
आयोजकों ने घोषणा की कि मुंगरी कौथिग का आयोजन प्रत्येक वर्ष 22 अगस्त को इसी क्षेत्र में किया जाएगा। आयोजन को सफल बनाने में कुलदीप रावत की टीम से आयुष रावत, दिव्यांशु मधवाल, विनोद रावत और मयंक सुन्दली सहित तोल्युड़ांडा के ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों का कहना है कि आने वाले समय में इस आयोजन को और व्यापक रूप देते हुए स्थानीय कृषि उत्पादों, संस्कृति और ग्रामीण स्वरोजगार को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।