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नैनीताल के गांवों में दूषित पानी से हाहाकार, दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती; 5 स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी

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By Pahadnews24
August 31, 2026 • 1 min read
नैनीताल के गांवों में दूषित पानी से हाहाकार, दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती; 5 स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी
नैनीताल के गांवों में दूषित पानी से हाहाकार, दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती; 5 स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी (Photo: Pahad News)

नैनीताल। नैनीताल से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। कई गांवों में पीलिया, डायरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी बीमारियों के मामले सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और जल संस्थान ने पेयजल एवं सीवर लाइनों की जांच के साथ टैंकों की सफाई और क्लोरीनेशन का काम शुरू किया है। वहीं, जनहित और छात्रहित को देखते हुए क्षेत्र के पांच स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक अवकाश घोषित किया गया है।

 

कई गांवों में बीमारी फैलने का दावा

तल्लीताल के निचले क्षेत्र कृष्णापुर और दुर्गापुर से लगे वीरभट्टी, गांजा, छिंडां मल्ला, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला समेत आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से बीमारियां फैलने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ इलाकों में बड़ी संख्या में लोग पेट संबंधी बीमारी और पीलिया की चपेट में आए हैं।

 

बताया गया कि 13 अगस्त को एक निजी स्कूल के कुछ छात्रों में पीलिया के मामले सामने आने के बाद स्कूल बंद किया गया था। इसके बाद पेयजल व्यवस्था को लेकर जांच और सुधार कार्य शुरू किए गए।

 

जल संस्थान की जांच में पेयजल लाइन में सीवेज के मिश्रण की आशंका/समस्या सामने आने के बाद विभाग ने पेयजल और सीवर लाइनों को अलग करने का काम किया। इसके साथ ही पानी की टंकियों की सफाई कर उनमें क्लोरीन डाला जा रहा है।

 

ग्रामीणों ने हाईवे पर किया प्रदर्शन

ज्यूलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में लगातार लोगों के बीमार होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। सोमवार को ग्रामीणों ने नैनीताल-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग की।

 

ग्रामीणों का कहना है कि ज्यूलिकोट, वर्गोंमोंट, गांजा, छीड़ा, वीरभट्टी, कृष्णापुर, साडियाताल, तल्ला बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान और देवलडूंगा समेत कई क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर समस्या बनी हुई है।

 

ग्रामीणों के अनुसार, दूषित पानी के कारण पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि दुर्गापुर जलस्रोत के समीप सीवर टैंक में लीकेज होने के कारण सीवर और पेयजल के मिश्रण की समस्या पैदा हो रही है।

 

कई मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती

ग्रामीणों ने कई मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी है। ज्यूलिकोट निवासी 7 वर्षीय रुद्रा बरेली के श्रीराम मूर्ति अस्पताल में भर्ती बताया गया है। वहीं, ज्यूलिकोट निवासी खिलावती के दो बच्चों 17 वर्षीय अस्मित और 20 वर्षीय वंशिका को पेट संबंधी बीमारी के चलते नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

ग्रामीणों के मुताबिक ज्यूलिकोट निवासी 26 वर्षीय देव जोशी हल्द्वानी के उजाला सिग्नस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। वीरभट्टी निवासी 20 वर्षीय प्रियंका आर्या भी पेट संबंधी परेशानी के चलते बीडी पांडे अस्पताल में उपचार के बाद घर लौटी हैं, जबकि उनके 19 वर्षीय भाई हर्षवर्धन के भी पीलिया से पीड़ित होने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा क्षेत्र के अन्य मरीजों के विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन होने की बात ग्रामीणों ने कही है।

 

ग्रामीणों ने दावा किया कि सोमवार को पीएचसी गांजा में पेट संबंधी शिकायतों को लेकर 110 लोगों ने जांच कराई। इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल संबंधित स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं हुई है।

 

जल संस्थान ने शुरू किया क्लोरीनेशन

पेयजल विभाग के ईई अनीश पिल्लई के अनुसार, समस्या सामने आने के बाद इसके समाधान के लिए टीमें गठित की गई हैं। विभाग ने सीवर और पेयजल लाइनों को अलग किया है। इसके बाद पानी की टंकियों की सफाई कर क्लोरीन डाला गया है। अब टीमों की ओर से घर-घर जाकर पानी की टंकियों में भी क्लोरीन का छिड़काव किया जा रहा है।

 

5 स्कूलों में तीन दिन का अवकाश

ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट के पत्र का संज्ञान लेते हुए और सीडीओ के निर्देश पर मुख्य शिक्षाधिकारी ने छात्रहित एवं जनहित को देखते हुए ज्यूलिकोट क्षेत्र के पांच सरकारी और निजी स्कूलों में 1, 2 और 3 सितंबर को अवकाश घोषित किया है।

धरने में बीटीसी सदस्य हिमांशु पांडे और मनोज चनियाल समेत क्षेत्र के कई ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से पेयजल समस्या की स्थायी जांच, प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पानी की आपूर्ति और बीमार लोगों के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।


 

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