राजेश सूरी मौत मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई, CBI को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के चर्चित भूमि मामलों को उजागर करने वाले दिवंगत अधिवक्ता राजेश सूरी की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले में सुनवाई की। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने मामले में सीबीआई के अधिवक्ता को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
राजेश सूरी की बहन रीता सूरी और उनके भाई की ओर से दायर याचिकाओं में दौलत राम ट्रस्ट की करीब 700 बीघा जमीन, बलबीर रोड जज क्वार्टर, स्टाम्प घोटाले और एमडीडीए से जुड़े कथित फर्जीवाड़ों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय सीबीआई जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य की जांच एजेंसियां बड़े भू-माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि नैनीताल हाईकोर्ट में पैरवी के बाद देहरादून लौटते समय ट्रेन में राजेश सूरी को कथित तौर पर जहर देकर मार दिया गया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनकी मौत की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। रीता सूरी ने अदालत को बताया कि भू-माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें और उनके परिवार को जान-माल का खतरा बना हुआ है। उन्होंने सुरक्षा जारी रखने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सुरक्षा में तैनात गनर से ही उन्हें धमकियां मिल रही हैं और इसके संबंध में उनके पास ऑडियो-वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।
हत्या के आरोपी की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज
इसी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के खानपुर थाना क्षेत्र से जुड़े हत्या के मामले में आरोपी रोबिन पुत्र कमल वीर की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने कहा कि स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच में खामियां थीं, जिसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया।
रोबिन पर अपने साथियों अक्षय और अंकित के साथ मिलकर लूट के इरादे से डोईवाला निवासी रामशंकर की हत्या कर शव को गड्ढे में दबाने का आरोप है। आरोपी 13 दिसंबर 2024 से जेल में बंद है।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच फिलहाल महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण में है। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और इस स्तर पर जमानत देने से सबूतों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने अथवा जांच में बाधा पहुंचने की आशंका हो सकती है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी।