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उत्तरकाशी के सौली कस्बे में भू-धंसाव का खतरा बढ़ा, तीन और मकानों में पड़ी दरारें

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By Pahadnews24
August 13, 2026 • 1 min read
उत्तरकाशी के सौली कस्बे में भू-धंसाव का खतरा बढ़ा, तीन और मकानों में पड़ी दरारें
उत्तरकाशी के सौली कस्बे में भू-धंसाव का खतरा बढ़ा, तीन और मकानों में पड़ी दरारें (Photo: Pahad News)

उत्तरकाशी। नगर पंचायत नौगांव के सौली कस्बे में लगातार हो रहे भू-धंसाव से खतरा बढ़ता जा रहा है। मंगलवार रात हुई बारिश के बाद स्योरी मोटर मार्ग पर पहले से मौजूद दरारें और गहरी हो गईं, जबकि सड़क पर कई जगह गहरे गड्ढे भी बन गए हैं। भू-धंसाव की चपेट में आने से तीन और मकानों में दरारें पड़ने के बाद प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की मांग की 

 

बताया गया कि 8 अगस्त को स्योरी मोटर मार्ग पर भू-धंसाव के बाद कस्बे के आधा दर्जन से अधिक मकान खतरे की जद में आ गए थे। खतरे को देखते हुए कुछ परिवार अपने घर खाली कर चुके हैं। वहीं, पहले से मौजूद हल्की दरारें अब चौड़ी और गहरी होती जा रही हैं और कुछ नए मकानों में भी दरारें दिखाई दी हैं।

 

लोनिवि ने 8 अगस्त को सड़क पर वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने के लिए दरारों को मिट्टी और पत्थरों से भर दिया था, लेकिन बारिश के बाद दरारें दोबारा उभर आईं। सड़क पर बने गड्ढों के आसपास स्थानीय लोगों ने दुर्घटनाओं से बचाव के लिए लकड़ी की बल्लियां और पत्थर लगाए हैं। वार्ड सात के सभासद सुनील कोहली, पूर्व प्रधान श्याम लाल और राकेश जैन ने जिलाधिकारी से प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था करने की मांग की है।

 

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर 12 अगस्त को बड़कोट एसडीएम और भूवैज्ञानिक की टीम ने सौली के आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम के अनुसार 7-8 अगस्त को हुई भारी बारिश के बाद वार्ड सात में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग और नौगांव-स्योरी मोटर मार्ग के बीच भू-धंसाव के कारण कई भवनों में दरारें आई हैं। कुछ भवनों में अधिक दरार और झुकाव पाए जाने के कारण उन्हें रहने के लिए असुरक्षित माना गया और संबंधित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

 

भूवैज्ञानिक निरीक्षण में क्षेत्र में करीब तीन से चार मीटर मोटी मिट्टी की परत पाई गई। चट्टानों का आउटक्रॉप नहीं मिलने और वर्षा जल के जमीन में रिसाव को प्रथम दृष्टया भू-धंसाव का कारण माना जा रहा है। क्षेत्र में चीड़ के कई पेड़ भी ढाल की दिशा में झुके मिले हैं, जिससे भू-भाग में लगातार मूवमेंट की आशंका जताई गई है। प्रशासन के अनुसार विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर अति संवेदनशील क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के विस्थापन को लेकर निर्णय लिया जाएगा।


 

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