उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कृषि को लाभ का सौदा बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। अब गांव स्तर पर ही 'माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट' (Micro Processing Units) स्थापित किए जाएंगे, जिससे अदरक, हल्दी, और पहाड़ी प्याज जैसे जैविक उत्पादों को सुखाकर और प्रोसेस करके पाउडर के रूप में बड़े बाजारों तक पहुँचाया जा सके।

मुख्य बिंदु:

वैल्यू एडिशन पर जोर: कच्चे माल को सस्ते दाम पर बेचने के बजाय, किसान अब उनकी प्रोसेसिंग करेंगे। उदाहरण के लिए, सूखे हुए अदरक (सौंठ) और प्याज के पाउडर की मांग मेट्रो शहरों में काफी अधिक है।

मशीनों पर 50% सब्सिडी: सरकार ने घोषणा की है कि जो युवा या स्वयं सहायता समूह (SHG) अपने गांव में डिहाइड्रेशन मशीन या प्रोसेसिंग यूनिट लगाएंगे, उन्हें लागत पर 50% तक की सब्सिडी दी जाएगी।

स्थानीय संसाधनों का उपयोग: इसके साथ ही, चीड़ की पत्तियों (पीरूल) से हस्तशिल्प और कागज बनाने की छोटी इकाइयों को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।

पलायन रोकने में मददगार

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों में बंदरों और जंगली जानवरों की समस्या के कारण खेती मुश्किल हो गई है, लेकिन औषधीय और प्रोसेस्ड उत्पादों के जरिए इस घाटे को कम किया जा सकता है। इससे न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी अपने घर के पास ही उद्यमी बनने का मौका मिलेगा।