भाजपा में टिकट की ‘अग्निपरीक्षा’ शुरू, सर्वे से लेकर सांसदों की राय तक बनेगी रिपोर्ट
देहरादून: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा में टिकट को लेकर अंदरूनी कवायद तेज होने की चर्चा है। विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मार्च 2027 में पूरा होना है। ऐसे में पार्टी के सामने 2022 में जीती 47 सीटों को बचाने के साथ उन 23 सीटों पर वापसी की चुनौती भी है, जहां उसे पिछली विधानसभा में हार मिली थी।
भाजपा के भीतर टिकट चयन को लेकर संभावित सर्वे और फीडबैक प्रक्रिया की चर्चा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अक्टूबर में अंतिम सर्वे कराया जा सकता है। इसमें मौजूदा विधायकों की लोकप्रियता के साथ क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच मौजूदगी, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, संगठन के साथ तालमेल और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों से मिलने वाला फीडबैक भी टिकट चयन में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस बार सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि मौजूदा विधायक अपने क्षेत्र में कितने लोकप्रिय हैं, बल्कि पार्टी के सामने उनकी संभावित चुनावी स्थिति भी एक महत्वपूर्ण सवाल होगी। क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के कामकाज, जनता की शिकायतों पर प्रतिक्रिया, सरकारी योजनाओं की स्थिति, संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी और कार्यकर्ताओं के साथ संबंध जैसे मुद्दों पर रिपोर्ट तैयार होने की संभावना है।
इसके अलावा 2022 के चुनावी आंकड़ों और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। जीत का अंतर, पिछली बार दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार की वर्तमान स्थिति और विपक्ष द्वारा उतारे जाने वाले संभावित चेहरे जैसे पहलू भी टिकट के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। यानी किसी सीट पर मौजूदा विधायक की स्थिति का आकलन उसके सामने मौजूद संभावित प्रतिद्वंद्वी को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
उत्तराखंड की अलग-अलग विधानसभा सीटों में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं। पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं और प्रत्येक विधानसभा में स्थानीय सामाजिक समीकरण अलग प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में पार्टी के सर्वे में संभावित उम्मीदवार की विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच स्वीकार्यता और स्थानीय राजनीतिक पकड़ को भी परखा जाना संभव है।
उम्र को लेकर भी भाजपा में चर्चा रहती है, लेकिन केवल उम्र के आधार पर किसी विधायक का टिकट कटना तय है, ऐसा निष्कर्ष सार्वजनिक जानकारी के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। विधायक की सक्रियता, क्षेत्र में पकड़ और संगठन के साथ उसका तालमेल जैसे कारक भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। विधायक निधि के उपयोग और क्षेत्रीय विकास कार्यों को भी मूल्यांकन के संभावित मानकों में शामिल किए जाने की चर्चा है।
टिकट चयन की प्रक्रिया में मंडल और जिलास्तर के फीडबैक के अलावा सांसदों की राय, संगठन की रिपोर्ट और सर्वे एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी भी भूमिका निभा सकती है। हालांकि भाजपा की आंतरिक बैठकों और रिपोर्टों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है, इसलिए अभी किसी विशेष विधायक या नए चेहरे का टिकट तय मानना जल्दबाजी होगी।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 20 सीटें मिली थीं। 2027 के लिए भाजपा के सामने जीती हुई सीटों को बनाए रखने और पिछली बार हारी सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति है। ऐसे में आने वाले महीनों में सर्वे, संगठनात्मक फीडबैक और संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता उत्तराखंड भाजपा की टिकट प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।