अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग: मुख्यमंत्री धामी के काशीपुर दौरे के दौरान नजरबंदी का आयुष रावत ने लगाया आरोप
काशीपुर, 14 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय मीडिया प्रभारी आयुष रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के काशीपुर दौरे के दौरान कथित तौर पर पुलिस चौकी में नजरबंद किए जाने का आरोप लगाया है। आयुष ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण में निष्पक्ष जांच, कथित VIP की भूमिका की पड़ताल और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्रदेश की जनता की भावनाओं और मामले को लेकर युवाओं में व्याप्त आक्रोश से उन्हें अवगत कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला।
‘अंकिता के माता-पिता के आंसुओं में अपने माता-पिता को देखता हूं’
आयुष रावत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता को रोते हुए देखकर उन्हें अपने माता-पिता की याद आती है। उन्होंने कहा कि उनकी भी एक बहन है और उनकी उम्र भी लगभग अंकिता की उम्र के आसपास है। ऐसे में अंकिता के माता-पिता की आंखों में आंसू देखकर उनके मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती, तो क्या वह चुप रह पाते? आयुष के अनुसार, हर बार उनके मन से यही जवाब आता है कि वह चुप नहीं रह सकते।
उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के काशीपुर दौरे के दौरान वह उनसे मिलकर यह बताना चाहते थे कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड के स्वाभिमान और जनभावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने मामले में कथित VIP की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग को प्रदेश की जनता की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल बताया।
कुंडेश्वरी पुलिस चौकी में नजरबंद रखने का लगाया आरोप
आयुष रावत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखने की कोशिश के दौरान उन्हें कुंडेश्वर पुलिस चौकी में जबरन नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के काशीपुर से रवाना होने तक उन्हें रिहा नहीं किया गया।
इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए आयुष ने कहा कि अपने ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने की मांग करना क्या अपराध है? उन्होंने सवाल किया कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपने मुख्यमंत्री के सामने जनहित से जुड़े मुद्दे रखने का अधिकार नहीं है?
आयुष ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री से अपील की कि वे अंकिता के माता-पिता के दर्द और न्याय की मांग कर रहे प्रदेश के युवाओं की भावनाओं को समझें। उन्होंने कहा कि सरकार को सवाल उठाने वाले लोगों को रोकने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए और जनहित के मुद्दों पर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
कथित VIP की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए आयुष रावत ने कहा कि मामले में कथित VIP की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के संबंध में उठ रही आपत्तियों और जनभावनाओं को भी मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की इच्छा जताई।
आयुष ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति से बदला लेने की नहीं, बल्कि अंकिता को न्याय दिलाने की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि जनता के मन में उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान हो सके।
‘क्या मुख्यमंत्री केवल भाजपा के हैं या पूरे उत्तराखंड के?’
आयुष रावत ने मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उन्हें राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक की बात सुननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवा भी इसी मिट्टी के बेटे हैं और प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा तथा उन्हें न्याय दिलाने की चिंता करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाने वाले युवाओं को नजरबंद करने के बजाय उनकी भावनाओं को समझा जाए।
अपनी पोस्ट के अंत में आयुष रावत ने अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही। उन्होंने लिखा कि अंकिता केवल एक नाम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी और किसी परिवार की पूरी दुनिया थी। उन्होंने न्याय की मांग दोहराते हुए कहा कि अंकिता को न्याय मिलने तक उनकी आवाज न रुकेगी और न झुकेगी।
आयुष रावत ने अपनी पोस्ट का समापन ‘अंकिता की माँ को न्याय दो’ के आह्वान के साथ किया।
नोट: पुलिस द्वारा नजरबंदी की परिस्थितियों और संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई के संबंध में स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इस खबर में उक्त घटनाक्रम को आयुष रावत के सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।