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34 यात्रियों की जान बचाकर शहीद हुआ चालक, ब्रेक फेल बस को पहाड़ी से भिड़ाकर टाला बड़ा हादसा

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By Pahadnews24
June 3, 2026 • 1 min read
34 यात्रियों की जान बचाकर शहीद हुआ चालक, ब्रेक फेल बस को पहाड़ी से भिड़ाकर टाला बड़ा हादसा
34 यात्रियों की जान बचाकर शहीद हुआ चालक, ब्रेक फेल बस को पहाड़ी से भिड़ाकर टाला बड़ा हादसा (Photo: Pahad News)

चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसमें रोडवेज बस चालक ने अपनी जान की कुर्बानी देकर 34 यात्रियों की जान बचा ली। यह घटना रायकोट महर के बकरियां मंदिर के पास उस समय हुई जब बस के ब्रेक अचानक फेल हो गए।


 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, टनकपुर डिपो की बस धारचूला से टनकपुर की ओर जा रही थी। बस जैसे ही लोहाघाट क्षेत्र में पहुंची, अचानक उसके ब्रेक फेल हो गए और वाहन पूरी तरह अनियंत्रित हो गया। बस में करीब 34 यात्री सवार थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।


 

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए चालक बेनीराम थ्वाल ने अद्भुत सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने बस को सीधा गहरी खाई की ओर जाने से रोकते हुए पहाड़ी की तरफ मोड़ दिया और वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। इस निर्णय से एक बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्रियों की जान बच गई।


 

हालांकि इस दौरान एक दर्दनाक हादसा भी हुआ। टक्कर के झटके से ड्राइवर साइड का दरवाजा खुल गया और चालक बेनीराम थ्वाल बस से नीचे गिर पड़े। इसी दौरान बस का पहिया उनके ऊपर चढ़ गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।


 

इस हादसे में एक महिला यात्री घायल हुई है, जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से बस को हटाकर शव को बाहर निकाला गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।


 

प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण ब्रेक फेल होना बताया जा रहा है, हालांकि तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।


 

घटना के बाद स्थानीय लोगों और यात्रियों ने चालक बेनीराम थ्वाल की बहादुरी को सलाम किया। लोगों का कहना है कि यदि उन्होंने यह साहसिक निर्णय नहीं लिया होता, तो बड़ी संख्या में जानमाल का भारी नुकसान हो सकता था।


 

वहीं इस घटना ने रोडवेज बसों की तकनीकी स्थिति और नियमित जांच व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वाहनों की समय-समय पर सख्त तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।


 

कर्तव्य निभाते हुए चालक बेनीराम थ्वाल ने भले ही अपनी जान गंवा दी, लेकिन उनकी बहादुरी ने 34 परिवारों को उजड़ने से बचा लिया।


 

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