उत्तराखंड के 800 करोड़ रुपये के LUCC चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई, दो मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित 800 करोड़ रुपये के एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कथित मास्टरमाइंडों को मुंबई से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किशन जैन और पंकज जैन के रूप में हुई है, जो लंबे समय से फरार चल रहे थे।
सीबीआई के अनुसार, लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) द्वारा उत्तराखंड के एक लाख से अधिक निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया और बाद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं तथा धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।
इस मामले में उत्तराखंड पुलिस द्वारा 18 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर नवंबर 2025 में जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की। साथ ही विभिन्न राज्यों में व्यापक स्तर पर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई भी की गई।
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि लंबे समय तक चली जांच और लगातार प्रयासों के बाद दोनों आरोपियों का मुंबई में पता लगाया गया, जहां से उन्हें गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपियों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर अनियमित जमा योजनाओं के माध्यम से जुटाई गई धनराशि के संग्रह, प्रबंधन, हेराफेरी और गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले से उत्तराखंड के कई जिलों के एक लाख से अधिक निवेशक प्रभावित हुए हैं। सीबीआई का दावा है कि यह राज्य में सामने आए सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक है। एजेंसी के अनुसार, जुटाई गई कुल धनराशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।
सीबीआई ने बताया कि दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर देहरादून स्थित बीयूडीएस (BUDS) अधिनियम न्यायालय में पेश किया जाएगा। इससे पहले 12 और 13 मई को एजेंसी ने पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था, जिनमें उत्तराखंड में एलयूसीसी के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर शामिल थे।
जांच के दौरान मिले दस्तावेज और संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भी सौंपे गए हैं। सीबीआई ने अनुरोध किया है कि अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध (BUDS) अधिनियम के तहत संबंधित संपत्तियों को जब्त कर पीड़ित निवेशकों को राहत प्रदान करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इस कार्रवाई के बाद घोटाले के पीड़ित निवेशकों में अपने धन की वापसी की उम्मीद एक बार फिर जगी है।