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देहरादून स्मार्ट सिटी की 30 इलेक्ट्रिक बसों के चक्के जाम, बंद होने की कगार पर ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’?

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By Pahadnews24
September 5, 2026 • 1 min read
देहरादून स्मार्ट सिटी की 30 इलेक्ट्रिक बसों के चक्के जाम, बंद होने की कगार पर ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’?
देहरादून स्मार्ट सिटी की 30 इलेक्ट्रिक बसों के चक्के जाम, बंद होने की कगार पर ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’? (Photo: Pahad News)

देहरादून: स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में संचालित हो रही 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ड्राइवरों की हड़ताल के चलते ठप हो गया है। सभी बसें ISBT ट्रांसपोर्ट नगर में खड़ी हैं। कुछ ड्राइवरों पर कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विवाद अब कर्मचारियों की नौकरी, वेतन, बस संचालन और थर्ड पार्टी कंपनी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

 

ड्राइवरों की हड़ताल से थमा संचालन

कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ ड्राइवरों को अचानक नौकरी से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ा और इसके विरोध में सभी रूट की बसों का संचालन रोक दिया गया। वहीं, देहरादून स्मार्ट सिटी के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तीरथ पाल सिंह का कहना है कि कुछ ड्राइवरों के खिलाफ अनुशासनहीनता का मामला सामने आया था, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है और उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

 

क्या घाटे में चल रही हैं इलेक्ट्रिक बसें?

कर्मचारियों का दावा है कि विवाद केवल अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि बस संचालन करने वाली कंपनी में लंबे समय से वेतन भुगतान समेत कई समस्याएं बनी हुई हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, कुछ रूट पर पर्याप्त यात्री नहीं मिलते और कई बार बसें कम यात्रियों के साथ चलती हैं।

 

देहरादून स्मार्ट सिटी के तहत वर्ष 2021 से 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन निजी कंपनी Evey Trans के माध्यम से किया जा रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि संचालन आर्थिक रूप से घाटे में चल रहा है और इसके बावजूद व्यवस्था जारी है।

 

कर्मचारियों ने लगाया वेतन में देरी का आरोप

हटाए गए ड्राइवरों में शामिल गुलशन का आरोप है कि उन्हें और उनके साथियों को अचानक काम से हटा दिया गया। उनका कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होने के बाद ड्राइवरों ने सामूहिक रूप से सभी रूट पर बसों का संचालन रोक दिया।

 

थर्ड पार्टी कंपनी के जरिए संचालन का आरोप

कर्मचारी नेता बन्देश नौटियाल ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट सिटी द्वारा जिस कंपनी को बस संचालन की जिम्मेदारी दी गई है, उसके बजाय किसी दूसरी थर्ड पार्टी कंपनी के माध्यम से संचालन कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी आशीष चौहान से भी मुलाकात की गई है।

 

कर्मचारी नेता का यह भी आरोप है कि करीब पांच ड्राइवरों के साथ बड़ी संख्या में परिचालकों को भी अचानक हटाया गया है। हालांकि, थर्ड पार्टी व्यवस्था को लेकर स्मार्ट सिटी अधिकारियों की ओर से अलग स्थिति सामने आने की बात कही गई है।

 

UKD ने स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल

इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ठप होने के बाद मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के नेता राजेंद्र सिंह बिष्ट ने इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के साथ-साथ पूरे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

 

उन्होंने अधिकृत कंपनी और कथित थर्ड पार्टी व्यवस्था की जांच की मांग करते हुए करीब 1500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की जांच की मांग की है।

 

सवाल सिर्फ 30 बसों के खड़े होने का नहीं

देहरादून में 30 इलेक्ट्रिक बसों का एक साथ सड़क से बाहर होना सिर्फ ड्राइवरों की हड़ताल का मामला नहीं है। इसके साथ बस संचालन की आर्थिक व्यवहार्यता, कर्मचारियों की सेवा शर्तें, वेतन भुगतान, रूट की उपयोगिता और संचालन में अधिकृत कंपनी की भूमिका जैसे सवाल भी जुड़े हैं।

 

जिस ग्रीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को शहर में प्रदूषण और निजी वाहनों का दबाव कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, उसके सामने अब संचालन और प्रबंधन से जुड़े सवाल खड़े हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के बाद देहरादून की इलेक्ट्रिक बस सेवा का भविष्य क्या होगा और क्या यह मॉडल आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित हो पाएगा?


 

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