धामी-पांडे मुलाकात से बदले सियासी समीकरण? गदरपुर में 45 मिनट की बंद कमरे की बैठक बनी चर्चा का विषय
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी संगठन और सरकार के भीतर चल रही राजनीतिक हलचलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा विधायक अरविंद पांडे के आवास पर उनसे करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इस मुलाकात को प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से अरविंद पांडे अपनी ही सरकार और संगठन के प्रति नाराजगी जताते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री और विधायक के बीच संगठन, सरकार और आगामी चुनावी रणनीति सहित कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को भाजपा के भीतर संगठनात्मक एकजुटता मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में अरविंद पांडे कई मौकों पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर नजर आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे के दौरान भी पांडे पार्टी विधायकों के साथ अग्रिम पंक्ति में बैठने के बजाय पीछे बैठे दिखाई दिए थे। इसके अलावा उनके नाम से प्रधानमंत्री मोदी को लिखा गया एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया था। हालांकि बाद में अरविंद पांडे ने उस पत्र को फर्जी करार देते हुए इसे भाजपा और उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया था।
अरविंद पांडे को मनाने और संवाद स्थापित करने के प्रयास पहले से ही जारी थे। भाजपा सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी हाल के दिनों में उनके आवास पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी का स्वयं गदरपुर पहुंचना कई राजनीतिक संकेत देता है।
हालांकि मुख्यमंत्री धामी ने इस मुलाकात को लेकर मीडिया के सामने कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं अरविंद पांडे ने इसे पूरी तरह पारिवारिक और निजी कार्यक्रम बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उनके घर जन्मे जुड़वा पौत्र-पौत्री को आशीर्वाद देने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सभी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता हैं तथा संगठन के हित में मिलकर काम कर रहे हैं।
अरविंद पांडे ने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी और इसके लिए सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर कार्य करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही इस मुलाकात को पारिवारिक भेंट बताया जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने कहीं अधिक व्यापक हैं। आगामी चुनावों से पहले भाजपा नेतृत्व का यह कदम संगठन में एकजुटता का संदेश देने और संभावित असंतोष को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मुलाकात के बाद अरविंद पांडे के तेवर स्थायी रूप से नरम पड़ते हैं या प्रदेश की राजनीति में आगे भी नए घटनाक्रम देखने को मिलते हैं।