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उत्तरकाशी में ट्रैकिंग कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, लापता ट्रेकर बबीता पांडे के नाम पर बनाया गया फर्जी परमिट

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By Pahadnews24
June 4, 2026 • 1 min read
उत्तरकाशी में ट्रैकिंग कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, लापता ट्रेकर बबीता पांडे के नाम पर बनाया गया फर्जी परमिट
उत्तरकाशी में ट्रैकिंग कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, लापता ट्रेकर बबीता पांडे के नाम पर बनाया गया फर्जी परमिट (Photo: Pahad News)

उत्तरकाशी। दयारा बुग्याल ट्रेक पर लापता हुई ट्रेकर बबीता पांडे के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि संबंधित ट्रैकिंग एजेंसी ने बबीता पांडे के नाम पर फर्जी ट्रेकिंग परमिट तैयार कर वन विभाग को जमा किया था। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।


 

जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी ने बताया कि पर्यटन विभाग के सिंगल विंडो सिस्टम के आधिकारिक पोर्टल से बबीता पांडे के नाम कोई अनुमति पत्र जारी ही नहीं किया गया था। इसके बावजूद एजेंसी ने एक फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे वैध परमिट के रूप में प्रस्तुत किया।


 

जांच में पता चला कि ट्रेकिंग एजेंसी ने पहले से जारी एक अनुमति पत्र में नामों की काट-छांट कर नया फर्जी परमिट तैयार किया। मूल अनुमति पत्र में कुलदीप सिंह, अनिकेत कुमार शाह, अनंत रंजन, आराधना द्विवेदी और रवि के नाम दर्ज थे। फर्जी दस्तावेज में अनंत रंजन की जगह हरमनप्रीत सिंह, आराधना द्विवेदी की जगह बबीता पांडे और रवि की जगह हरमन पाल सिंह का नाम दर्ज कर दिया गया।


 

जिला पर्यटन अधिकारी के अनुसार, फर्जी परमिट पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर मूल अनुमति पत्र और उसमें दर्ज वास्तविक नाम सामने आ जाते हैं, जिससे फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई है।


 

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही एजेंसी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।


 

गौरतलब है कि ट्रेकिंग गतिविधियों को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ नामक सिंगल विंडो ऑनलाइन सिस्टम विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से ट्रेकर्स को आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, इंश्योरेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद ऑनलाइन अनुमति पत्र जारी किया जाता है।


 

प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था ट्रेकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के उद्देश्य से लागू की गई थी, लेकिन अब सामने आया यह मामला ट्रेकिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


 

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