मालवीय नगर अग्निकांड: 21 मौतों का जिम्मेदार कौन? उत्तराखंड के शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी पर उठे सवाल
दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लॉरिश स्टे होटल में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत और 37 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद अब हादसे की जांच और कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग ग्राउंड फ्लोर पर संचालित रेस्टोरेंट के किचन से शुरू हुई और कुछ ही समय में पूरी इमारत में फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भवन में केवल एक संकरा प्रवेश और निकास मार्ग था, जिसके कारण कई लोग बाहर नहीं निकल सके। कुछ लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग तक लगानी पड़ी।
जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों के अनुसार इमारत के पास फायर एनओसी नहीं थी। साथ ही यह भी आरोप हैं कि भवन में स्वीकृत क्षमता से अधिक कमरे बनाए गए थे और कई नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। बताया जा रहा है कि जिस रेस्टोरेंट को सीमित गतिविधियों की अनुमति थी, वहां पूर्ण किचन संचालित किया जा रहा था।
इसी बीच पुलिस ने होटल से जुड़े शेफ केशव नेगी को गिरफ्तार किया है। केशव नेगी मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी बताए जा रहे हैं और रोजगार की तलाश में दिल्ली आकर रसोई में काम कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोग पूछ रहे हैं कि क्या भवन की वैधता, फायर सुरक्षा, निर्माण मानकों और लाइसेंस संबंधी नियमों की जिम्मेदारी एक शेफ की हो सकती है?
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि भवन में फायर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, यदि अवैध निर्माण हुआ था, यदि एक ही एंट्री-एग्जिट के साथ होटल संचालित किया जा रहा था और यदि नियमों का उल्लंघन लंबे समय से जारी था, तो इसके लिए जिम्मेदार भवन मालिक, प्रबंधन और निगरानी करने वाले विभागों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
मामला अब केवल आग लगने की घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जवाबदेही और न्याय का विषय बन गया है। पीड़ित परिवारों और आम जनता की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो तथा हादसे के लिए जिम्मेदार सभी व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस भीषण त्रासदी के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और किन-किन स्तरों पर लापरवाही हुई।