पौड़ी में गुलदार का बढ़ता आतंक, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा लगातार हमलों से दहशत में लोग, वन विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरे ग्रामीण
पौड़ी: गढ़वाल के पौड़ी जिले में मानव और वन्यजीव संघर्ष अब भयावह रूप लेता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में गुलदार के लगातार बढ़ते हमलों ने लोगों की जिंदगी को डर के साये में धकेल दिया है। आए दिन हो रही घटनाओं के कारण गांवों में दहशत का माहौल है और कई परिवार अब पलायन तक का मन बनाने लगे हैं।
बीते दिनों विकासखंड पौड़ी के बमठी गांव में गुलदार ने एक व्यक्ति को अपना निवाला बना लिया था। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। वहीं घटना के अगले ही दिन शनिवार सुबह करीब 10 बजे गुलदार ने गांव की महिला रेखा देवी पर दिनदहाड़े हमला कर दिया। महिला घर के पीछे जा रही थी, तभी घात लगाए बैठे गुलदार ने हमला बोल दिया। हालांकि ग्रामीणों के शोर मचाने पर गुलदार जंगल की ओर भाग गया और महिला की जान बच गई।
लगातार हो रहे हमलों से नाराज ग्रामीण बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पौड़ी पहुंचे और डीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। लोगों ने वन विभाग और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग समय रहते ठोस कदम नहीं उठा रहा, जिसकी वजह से लोगों की जान खतरे में पड़ गई है।
वन विभाग के अनुसार इलाके में एक गुलदार को पिंजरे में कैद किया गया है जबकि एक अन्य को मार गिराया गया है। डीएफओ गढ़वाल वन प्रभाग पौड़ी महातिम यादव ने बताया कि क्षेत्र में दो शूटरों समेत तीन टीमें तैनात की गई हैं ताकि गुलदार के आतंक पर जल्द काबू पाया जा सके।
इधर विकासखंड एकेश्वर के सासौं गांव में भी गुलदार का खौफ देखने को मिला, जहां शनिवार सुबह गुलदार ने एक बछिया को मार डाला जबकि दूसरी को घायल कर दिया। लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
पहले भी हो चुकी हैं कई घटनाएं
10 मार्च को कोट ब्लॉक के बलमणा गांव में 45 वर्षीय प्रकाश लाल का शव संदिग्ध हालत में मिला था। ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि उन्हें गुलदार ने अपना शिकार बनाया। वहीं इडवालस्यूं क्षेत्र में भी गुलदार के हमले में एक महिला की मौत हो चुकी है। इससे पहले गजल्ड़ और बाड़ा गांव में भी हमले के मामले सामने आ चुके हैं।
अब लगातार बढ़ते हमलों के बीच ग्रामीणों ने बड़े जन आंदोलन की चेतावनी दी है। उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा भी “जन आक्रोश आंदोलन” शुरू करने का ऐलान किया गया है, जिसमें वन्यजीव आतंक से निजात दिलाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी।