क्या बदलने वाली है भारतीय करेंसी? RBI फिर कर रहा प्लास्टिक नोटों पर मंथन
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर देश में प्लास्टिक आधारित करेंसी नोटों को लागू करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बढ़ती नकदी मांग और मुद्रा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने हाल के महीनों में इस विषय पर कई स्तरों पर चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही प्लास्टिक नोटों से जुड़ा एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।
दरअसल, पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में प्लास्टिक नोट अधिक टिकाऊ माने जाते हैं। इनकी उम्र लंबी होती है और ये पानी, धूल तथा सामान्य टूट-फूट से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद लंबे समय में इनके रखरखाव और प्रतिस्थापन पर होने वाला खर्च काफी कम हो सकता है।
सूत्र बताते हैं कि आरबीआई ने हाल ही में पटना और मुंबई में आयोजित बैठकों में प्लास्टिक नोटों की व्यवहारिकता, वितरण व्यवस्था और तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। बैंकिंग और नकदी प्रबंधन प्रणाली में हुए तकनीकी सुधारों के कारण अब अधिकांश आधुनिक एटीएम और करेंसी प्रोसेसिंग मशीनें ऐसे नोटों के अनुकूल हो चुकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते प्रचलन के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 15 मई तक प्रचलन में मौजूद नकदी का कुल मूल्य बढ़कर 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यापारों और दैनिक लेनदेन में नकदी की मजबूत भूमिका को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
यदि प्लास्टिक नोटों की योजना आगे बढ़ती है तो यह भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे नोटों की आयु बढ़ाने के साथ-साथ नकदी प्रबंधन को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।