सतपुली कांड: पंकज कुमार की मौत पर उठे पुलिस प्रताड़ना के आरोप, गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस का थाने पर घेराव, निष्पक्ष जांच की मांग
सतपुली (पौड़ी गढ़वाल)
पौड़ी गढ़वाल के सतपुली-रैतपुर क्षेत्र में 20 वर्षीय युवक पंकज कुमार की संदिग्ध आत्महत्या का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोपों के बीच, पूर्व कैबिनेट मंत्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सतपुली थाने का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
📍 माँ के आरोपों ने सबको झकझोर दिया
इस पूरे मामले में पंकज की माँ द्वारा लगाए गए आरोप बेहद चौंकाने वाले और संवेदनशील हैं। परिवार का आरोप है कि:
- पंकज को पुलिस कस्टडी में मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर किया गया।
- पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट से आहत होकर ही युवक ने आत्मघाती कदम उठाया।
- परिजनों का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है।
🔥 थाने के बाहर 'न्याय' की हुंकार
कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंचकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
"यह केवल एक युवक की मौत नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर लगा एक गहरा दाग है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी कहाँ जाएगा? हम पंकज को न्याय दिलाए बिना शांत नहीं बैठेंगे।"
📢 कांग्रेस और परिजनों की मुख्य मांगें:
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने अपनी चार सूत्रीय मांगें रखी हैं:
- पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच (CBI या न्यायिक जांच) कराई जाए।
- दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
- पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
- परिवार को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
सिस्टम पर सवाल और जन-आक्रोश
पंकज की मौत के बाद से ही पूरे सतपुली और आस-पास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर पुलिस का व्यवहार संवेदनशील होता, तो एक युवा जान को बचाया जा सकता था। फिलहाल, कांग्रेस के इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और सबकी नजरें आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
पहाड़ न्यूज़ 24 कमेंट: उत्तराखंड में पुलिस उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ना चिंता का विषय है। यदि खाकी अपनी मर्यादा भूलकर जनता पर अत्याचार करेगी, तो लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा। प्रशासन को इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करना ही होगा।