महिला बेस अस्पताल सिमली की बदहाली पर फूटा जनाक्रोश, मांगें पूरी न होने पर शुरू हुआ आमरण अनशन
चमोली जनपद के सिमली स्थित महिला बेस अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पताल की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन को अब जनसमर्थन मिलने लगा है। प्रधान संगठन चमोली के अध्यक्ष उमेश खंडूड़ी के नेतृत्व में चल रहे सत्याग्रह आंदोलन के समर्थन में जिले के कई ग्राम प्रधानों ने रैली निकालकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में शामिल महिला ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि महिला बेस अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद अस्पताल में न तो महिला चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही महिलाओं को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पा रही हैं। ग्राम प्रधान शिवानी, लीला देवी, राखी देवी और सरस्वती देवी ने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग लगातार अनदेखी कर रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य पंकज लडोला ने बताया कि अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और तकनीशियनों के पद खाली होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधान संगठन के अध्यक्ष उमेश खंडूड़ी ने कहा कि नौ दिनों तक चले सत्याग्रह आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसी कारण आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए आमरण अनशन शुरू कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार की ओर से मांगों के समाधान संबंधी शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक अनशन जारी रहेगा।
इधर आयुष चिकित्सकों ने भी अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चिकित्सकों का कहना है कि एसीपी/डीएसीपी का समयबद्ध लाभ, चिकित्सा संवर्ग के लिए विभागीय निदेशक की नियुक्ति, नवनियुक्त चिकित्साधिकारियों का विनियमितीकरण समेत सात सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कई दौर की वार्ता के बावजूद सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ चमोली के मीडिया प्रभारी डॉ. मनीष खंडूड़ी ने बताया कि प्रांतीय संगठन के निर्णय के तहत 15 जून से प्रदेशभर के आयुष चिकित्सक निदेशालय परिसर में एकत्र होकर आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत करेंगे। चिकित्सकों का कहना है कि सरकार के उदासीन रवैये के कारण अब आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और उन्हें आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बढ़ते जनाक्रोश और चिकित्सकों के आंदोलन ने सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इन मांगों पर कब और क्या निर्णय लेता है।