उत्तराखंड में ‘रोडी टूरिज्म’ का खतरा: गांवों का पानी गंदा, जंगल जल रहे, स्थानीय लोग परेशान
देहरादून, उत्तराखंड | 10 मई 2026
उत्तराखंड में इस समय पर्यटन सीजन अपने चरम पर है, लेकिन इसके साथ एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है — “रोडी टूरिज्म”। राज्य के कई पहाड़ी इलाकों में स्थानीय लोग अब पर्यटकों के व्यवहार, बढ़ते कूड़े, शराबखोरी और प्राकृतिक स्रोतों को हो रहे नुकसान को लेकर खुलकर नाराज़गी जता रहे हैं।
देहरादून और मसूरी के आसपास के झरनों और जल स्रोतों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पर्यटक पानी के स्रोतों में नहा रहे हैं, शराब पी रहे हैं और कचरा फेंक रहे हैं, जिससे गांवों की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कुछ जगहों पर पानी में संक्रमण और बीमारियों की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं।
इसी बीच उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य में 200 से ज्यादा स्थानों पर जंगलों में आग लगी, जिससे सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पर्यटन बढ़ाने पर तो जोर दे रही है, लेकिन गांवों के संसाधनों और पर्यावरण की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। कई ग्रामीणों ने मांग की है कि संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की संख्या नियंत्रित की जाए और सख्त नियम लागू किए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जल स्रोत दोनों गंभीर संकट में आ सकते हैं।