देवभूमि शर्मसार: चंपावत कांड पर सुलग उठा उत्तराखंड, क्या 'सत्ता' के दबाव में दब रही है बेटी की चीख?
देहरादून/चंपावत:
उत्तराखंड, जिसे हम देवभूमि कहते हैं, आज एक बार फिर बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। चंपावत जिले में 10वीं की छात्रा के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर पहाड़ की गलियों तक उबाल पैदा कर दिया है।
क्या है मामला?
बीती 5 मई को एक छात्रा अपनी सहेली की मेहंदी से लौट रही थी, जब आरोप है कि तीन लोगों ने उसे बंधक बनाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। परिजनों ने FIR में स्थानीय रसूखदारों के नाम लिए हैं, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
पुलिस की थ्योरी और जनता का गुस्सा:
चंपावत पुलिस ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि यह एक 'साजिश' हो सकती है और नामजद आरोपियों को फिलहाल क्लीन चिट की तरफ इशारा किया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। लेकिन जनता और विपक्ष इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं।
विपक्ष का हल्ला बोल:
आज पूरे प्रदेश में कांग्रेस, UKD और अन्य सामाजिक संगठनों ने सरकार का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सत्ता पक्ष से जुड़े होने के कारण आरोपियों को बचाया जा रहा है। अंकिता भंडारी केस की यादें अभी ताज़ा थीं कि चंपावत की इस घटना ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।