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युवा उक्रांद के मीडिया प्रभारी आयुष रावत का सरकार पर हमला: नगरासू प्रकरण उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा

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By Pahadnews24
June 23, 2026 • 1 min read
युवा उक्रांद के मीडिया प्रभारी आयुष रावत का सरकार पर हमला: नगरासू प्रकरण उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा
युवा उक्रांद के मीडिया प्रभारी आयुष रावत का सरकार पर हमला: नगरासू प्रकरण उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा (Photo: Pahad News)

रुद्रप्रयाग। नगरासू स्थित गुरुद्वारे की चौथी मंजिल और छत पर पिछले चार दिनों से डटे चार निहंग सिख आखिरकार पंजाब से आए निहंग सिखों के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी वार्ता के बाद नीचे उतर आए। इसके साथ ही कई दिनों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के शांतिपूर्ण समाधान पर राहत की सांस ली, लेकिन इस पूरे मामले को लेकर युवा उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।


 

युवा उत्तराखंड क्रांति दल के मीडिया प्रभारी आयुष रावत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नगरासू प्रकरण उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा जैसे अति संवेदनशील समय में, जब प्रदेश में लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन हो रहा है, तब कुछ लोगों द्वारा कई दिनों तक क्षेत्र की शांति व्यवस्था को प्रभावित किया गया और पूरे इलाके में भय तथा असुरक्षा का माहौल बना रहा।


 

आयुष रावत ने आरोप लगाया कि घटनाक्रम के दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं, स्थानीय लोगों, प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी रही तथा पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती दी गई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिसकर्मियों पर तलवार से हमला करने और उन्हें घायल करने की कोशिश तक की घटनाएं सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन चार दिनों तक संबंधित लोगों को गुरुद्वारे की छत से नीचे उतारने में सफल नहीं हो सका।


 

उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि उत्तराखंड में यदि स्थानीय युवा रोजगार, भू-कानून, मूल निवास, भ्रष्टाचार या जनसरोकारों से जुड़े किसी मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो प्रशासन कुछ ही घंटों में उन्हें हिरासत में लेने, धरना समाप्त कराने और बल प्रयोग करने में देर नहीं करता। लेकिन नगरासू प्रकरण में चार दिनों तक पुलिस और प्रशासन पूरी तरह असहाय दिखाई दिया।


 

रावत ने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर शांति व्यवस्था भंग करने, भय का माहौल पैदा करने, पत्थरबाजी करने और पुलिस पर हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगे, उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि चार दिनों तक चले इस पूरे घटनाक्रम के बाद संबंधित लोग न केवल बिना किसी स्पष्ट गिरफ्तारी के वहां से निकल गए, बल्कि मोटरसाइकिलों पर सवार होकर खुलेआम पंजाब के लिए रवाना हो गए।


 

उन्होंने आरोप लगाया कि रवाना होते समय यातायात नियमों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। तेज रफ्तार और तेज आवाज में मोटरसाइकिलें दौड़ाते हुए उनके निकलने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। युवा उक्रांद ने सवाल किया कि यदि यही कार्य कोई सामान्य उत्तराखंडी नागरिक करता तो क्या पुलिस का रवैया यही रहता?


 

आयुष रावत ने कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि उत्तराखंड में कानून का राज चल रहा है या फिर कानून का इस्तेमाल व्यक्ति और परिस्थिति देखकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी समान होने चाहिए और यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो उसके खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।


 

युवा उक्रांद ने राज्य सरकार से पूरे प्रकरण पर स्पष्ट जवाब देने, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनसम्मत कार्रवाई करने तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या समूह उत्तराखंड की शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था को चुनौती देने का साहस न कर सके। रावत ने कहा कि यदि सरकार इस मामले में जवाबदेही तय करने में विफल रहती है तो इससे जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि प्रदेश में कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से नहीं कराया जा रहा है।


 

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