सत्ता का दम नहीं आया काम! नवगठित नगर पंचायतों में BJP को बड़ा झटका, निर्दलियों का परचम
काशीपुर/चंपावत। उत्तराखंड की नवगठित नगर पंचायतों के चुनाव परिणामों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जिन सीटों पर भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी थी, वहां मतदाताओं ने निर्दलीय उम्मीदवारों पर भरोसा जताकर सत्ता पक्ष को बड़ा झटका दे दिया। ऊधमसिंहनगर की गढ़ीनेगी और चंपावत की पाटी नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गढ़ीनेगी नगर पंचायत में निर्दलीय प्रत्याशी अभिषेक सुखीजा ने भाजपा उम्मीदवार सचिन बाठला को 94 मतों से हराकर जीत दर्ज की। काशीपुर स्थित नवीन मंडी परिसर में मतगणना के दौरान मुकाबला इतना करीबी रहा कि चार बार री-काउंटिंग करानी पड़ी। हर बार आंकड़ों में बदलाव हुआ, लेकिन अंत में जीत निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में ही गई। अंतिम परिणाम में अभिषेक सुखीजा को 2047 और भाजपा प्रत्याशी को 1953 मत मिले।
उधर, चंपावत जिले की नवगठित पाटी नगर पंचायत में भी मतदाताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार नारायण लाल को अपना समर्थन दिया। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नवीन राम को 224 मतों के अंतर से पराजित किया। नारायण लाल को 738 जबकि नवीन राम को 514 वोट मिले। 39 मत अवैध घोषित हुए और 18 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।
इन दोनों परिणामों ने यह संदेश दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में केवल सत्ता या संगठन का दम हमेशा जीत की गारंटी नहीं होता। मतदाताओं ने स्थानीय नेतृत्व और व्यक्तिगत स्वीकार्यता को प्राथमिकता देते हुए निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया।
विशेष रूप से पाटी नगर पंचायत का परिणाम राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह चंपावत जिले में स्थित है। ऐसे में भाजपा की हार को विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं। चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि जनता का अंतिम फैसला जमीन पर किए गए काम और स्थानीय विश्वास के आधार पर तय होता है।