उत्तराखंड: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, 2028 तक ब्यासी सेक्शन में दौड़ेंगी ट्रेनें
ऋषिकेश। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाली बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के नेतृत्व में पहाड़ों के बीच सुरंगों का निर्माण समेत ट्रैक, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और स्टेशन भवनों से जुड़े कार्य एक साथ किए जा रहे हैं। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, काम तय समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ रहा है और 2028 तक ब्यासी सेक्शन में ट्रेनों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सिविल हिमांशु बड़ोनी के अनुसार, निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए सुरंगों की खुदाई के साथ उनकी फाइनल लाइनिंग का काम भी समानांतर रूप से किया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और स्टेशन भवनों का निर्माण भी चरणबद्ध तरीके से जारी है। उनका कहना है कि एक साथ कई स्तरों पर काम किए जाने से परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने में मदद मिलेगी।
125 किलोमीटर का सफर होगा आसान
करीब 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से लगने वाले लंबे समय की तुलना में रेल यात्रा काफी कम समय में पूरी होने की उम्मीद है। इससे बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले यात्रियों और चारधाम यात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।
परियोजना से रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। रेल सेवा शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी पहाड़ों तक पहुंचने का एक सुरक्षित और सुगम विकल्प मिलेगा।
16 मुख्य और 13 एस्केप टनल
परियोजना के तहत पहाड़ों में 16 मुख्य सुरंगों और 13 एस्केप सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एस्केप टनल को परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
निर्माण कार्य में सुरंगों की खुदाई और लाइनिंग के साथ ट्रैक, स्टेशन तथा अन्य जरूरी रेल ढांचे पर भी काम जारी है। परियोजना की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्माण एजेंसियों के सामने कई तकनीकी चुनौतियां हैं, लेकिन काम को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए निर्माण गतिविधियों को तेज किया गया है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के पूरा होने से केवल यातायात व्यवस्था ही बेहतर नहीं होगी, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से यात्रा व्यवस्था पर सड़क मार्ग का दबाव भी कम हो सकता है।
परियोजना के तहत योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को भी आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया गया है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल पहुंचने के बाद उत्तराखंड के कई पर्वतीय क्षेत्रों की देश के रेल नेटवर्क से सीधी कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
2028 तक ब्यासी सेक्शन में ट्रेन संचालन शुरू करने का लक्ष्य इस परियोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। पूरी परियोजना के आकार लेने के बाद ऋषिकेश से लेकर कर्णप्रयाग तक रेल कनेक्टिविटी उत्तराखंड के पर्वतीय विकास और चारधाम यात्रा के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।