आशुतोष नेगी के निष्कासन पर पुनर्विचार की मांग, युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने UKD नेतृत्व को भेजा पत्र
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) में आशुतोष नेगी के निष्कासन के फैसले को लेकर संगठन के भीतर पुनर्विचार की मांग उठने की खबर सामने आई है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, UKD युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने 30 अगस्त 2026 को केंद्रीय अध्यक्ष को पत्र भेजकर आशुतोष नेगी के निष्कासन के निर्णय पर पुनर्विचार किए जाने का आग्रह किया है।
सूत्रों के अनुसार, पत्र में कहा गया है कि आशुतोष नेगी के निष्कासन के निर्णय से युवा प्रकोष्ठ समेत संगठन से जुड़े कई युवा कार्यकर्ता गहराई से विचलित हैं। पत्र में आशुतोष नेगी को संगठन का वरिष्ठ एवं सक्रिय नेता बताते हुए कहा गया है कि उनके साथ संगठनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों में युवाओं को लगातार सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहा है।
पत्र में UKD को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और जनआकांक्षाओं के लिए संघर्ष करने वाले लोगों का परिवार बताते हुए कहा गया है कि संगठन के किसी सक्रिय एवं महत्वपूर्ण साथी के संबंध में लिया गया निर्णय गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में संगठन के भीतर संवाद एवं पुनर्विचार की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए।
आशीष नेगी की ओर से केंद्रीय नेतृत्व से आग्रह किया गया है कि आशुतोष नेगी के निष्कासन के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और संगठनात्मक हित में उनसे संवाद स्थापित कर सम्मानजनक एवं सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास किया जाए।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि युवा प्रकोष्ठ का उद्देश्य किसी निर्णय को चुनौती देना नहीं, बल्कि संगठन की एकता, कार्यकर्ताओं के मनोबल और उत्तराखंड क्रांति दल के व्यापक हितों की रक्षा करना है। पत्र के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व के अधिकार और संगठनात्मक अनुशासन का पूरा सम्मान करते हुए भी जहां संवाद से समाधान की संभावना हो, वहां अंतिम निर्णय से पहले पुनर्विचार का अवसर दिया जाना चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि इस पत्र के सामने आने के बाद आशुतोष नेगी के निष्कासन को लेकर UKD के भीतर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ मिल सकता है। अब नजर केंद्रीय नेतृत्व के रुख पर है कि वह युवा प्रकोष्ठ की इस मांग पर क्या निर्णय लेता है।
गौरतलब है कि आशुतोष नेगी के निष्कासन के बाद से ही संगठन के भीतर इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं और अब युवा प्रकोष्ठ की ओर से पुनर्विचार की औपचारिक मांग सामने आने से मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।