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उक्रांद के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले आशुतोष नेगी 6 साल के लिए निष्कासित, बोले- “मैं उक्रांद हूं, मुझे कोई हटा नहीं सकता”

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By Pahadnews24
August 29, 2026 • 1 min read
उक्रांद के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले आशुतोष नेगी 6 साल के लिए निष्कासित, बोले- “मैं उक्रांद हूं, मुझे कोई हटा नहीं सकता”
उक्रांद के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले आशुतोष नेगी 6 साल के लिए निष्कासित, बोले- “मैं उक्रांद हूं, मुझे कोई हटा नहीं सकता” (Photo: Pahad News)

देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की केंद्रीय अनुशासन समिति ने दल के नेता आशुतोष नेगी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ-साथ 6 वर्षों के लिए दल से निष्कासित करने का आदेश जारी किया है। 27 अगस्त 2026 को जारी पत्र में केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष राकेश सेमवाल ने आरोप लगाया कि नेगी द्वारा सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक माध्यमों पर दल के वरिष्ठ नेताओं एवं शीर्ष नेतृत्व के संबंध में कथित तौर पर “भ्रामक एवं तथ्यहीन” बयान दिए जा रहे थे। पत्र में पूर्व में जारी नोटिस और स्पष्टीकरण का भी उल्लेख किया गया है।

 

आशुतोष नेगी को उक्रांद के मजबूत स्तंभों में गिना जाता रहा है। वह अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा में आए थे और इसके बाद लगातार उत्तराखंड के विभिन्न जनमुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उक्रांद के पुनर्जीवन और संगठन को प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों से जोड़ने में भी उनके समर्थकों द्वारा उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है। आगामी चुनावों के मद्देनजर उन्हें चुनाव लड़ने के इच्छुक सदस्यों में शामिल किए जाने का भी पत्र में उल्लेख है।

 

अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद आशुतोष नेगी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि भाजपा से उक्रांद के एक नेता द्वारा उन्हें “निबटाने” के लिए 20 करोड़ रुपये की सुपारी लेने का आरोप लगाने के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई और इसे उन्होंने अपने आरोपों की पुष्टि के तौर पर पेश किया। नेगी ने लिखा, “मैं उक्रांद हूं, उक्रांद से मुझे न कोई हटा सकता है और न निलंबित कर सकता है।” साथ ही उन्होंने अपने विरोधियों को चेतावनी देते हुए लिखा कि “दलालों अब तुम्हारी खैर नहीं” और दावा किया कि यह पत्र उनके लिए “ताबूत में आखिरी कील” साबित होगा।

 

हालांकि, उक्रांद की ओर से जारी पत्र में 20 करोड़ रुपये की कथित सुपारी के आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। पत्र में कार्रवाई का आधार मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक/तथ्यहीन बयानों, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों और अनुशासनहीन गतिविधियों को बताया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उत्तराखंड की राजनीति में उक्रांद आगामी चुनावों को लेकर अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।


 

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