रक्षाबंधन पर इंसानियत की मिसाल, जिसे दुनिया ने कहा ‘पागल’, मुकेश सुयाल ने उसे माना बहन
रामनगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर रामनगर में इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहां समाजसेवी मुकेश सुयाल ने मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को बहन का दर्जा देते हुए उसकी राखी बंधवाई और इस रिश्ते को पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ स्वीकार किया।
रामनगर के आमडंडा, लखनपुर और आसपास के क्षेत्रों में अक्सर नजर आने वाली इस महिला को लोग आमतौर पर मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोग उसे ‘पागल’ कहकर दूरी बना लेते हैं, लेकिन मुकेश सुयाल की नजर में वह भी समाज का उतना ही सम्मानित हिस्सा है, जितना कोई अन्य व्यक्ति।
रक्षाबंधन के दिन जब मुकेश सुयाल महिला के सामने पहुंचे तो महिला ने उन्हें पहचान लिया और रोककर बातचीत की। दोनों के बीच अपनत्व और आत्मीयता का भाव देखने को मिला। इसके बाद महिला ने मुकेश सुयाल की कलाई पर राखी बांधी। मुकेश ने भी बिना किसी झिझक के इस रिश्ते को भाई-बहन के रूप में स्वीकार किया।
इस पूरे दृश्य की खास बात यह रही कि दोनों के बीच कोई खून का रिश्ता नहीं था, फिर भी राखी के इस छोटे से बंधन में अपनापन और भावनाओं की गहराई साफ नजर आई। मुकेश सुयाल का कहना है कि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति उसके सम्मान और इंसानी अधिकारों को कम नहीं करती। ऐसे लोगों को समाज से दूर करने के बजाय उनके साथ संवेदनशीलता, सम्मान और अपनत्व के साथ पेश आना चाहिए।
रक्षाबंधन पर रामनगर में सामने आई यह पहल समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गई—रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि सम्मान, संवेदना और दिल से भी बनते हैं। जिस महिला को समाज का एक हिस्सा ‘पागल’ कहकर नजरअंदाज कर देता है, उसे बहन का सम्मान देना यह याद दिलाता है कि सच्ची इंसानियत किसी की मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि उसके प्रति हमारे व्यवहार से पहचानी जाती है।