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18 साल बाद फिर सजा ऐतिहासिक भेड़ मेला, निवालगांव में उमड़ा आस्था का सैलाब

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By Pahadnews24
September 7, 2026 • 1 min read
18 साल बाद फिर सजा ऐतिहासिक भेड़ मेला, निवालगांव में उमड़ा आस्था का सैलाब
18 साल बाद फिर सजा ऐतिहासिक भेड़ मेला, निवालगांव में उमड़ा आस्था का सैलाब (Photo: Pahad News)

घनसाली। भिलंगना ब्लॉक की थाती कठूड़ पट्टी स्थित निवालगांव में रविवार को 18 साल के लंबे अंतराल के बाद ऐतिहासिक भव्य भेड़ कोथिक (भेड़-मेला) आयोजित किया गया। बौल्या चांदनी नागराजा के पावन प्रांगण में आयोजित मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचे। लंबे समय बाद आयोजित हुए इस पारंपरिक मेले को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

 

मेले का विधिवत शुभारंभ उत्तराखंड सरकार के ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी और स्थानीय विधायक शक्ति लाल शाह ने किया। इस दौरान क्षेत्र की विभिन्न देव डोलियों, देवी-देवताओं के निशानों और धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

 

दूर-दराज के गांवों से ग्रामीण अपनी भेड़-बकरियों के साथ मेले में पहुंचे और पारंपरिक भेड़ परिक्रमा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने देव डोलियों के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

 

पशुपालन और लोक आस्था से जुड़ी है परंपरा

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार भेड़ कोथिक की परंपरा क्षेत्र की लोक आस्था और पशुपालन की संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। मेले में पशुधन की सुख-समृद्धि, परिवारों की खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की जाती है।

 

किसी कारणवश पिछले 18 वर्षों से इस मेले का आयोजन नहीं हो पा रहा था। ऐसे में इस बार मेले के पुनः आयोजन से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

 

18 साल बाद जीवंत हुई लोक विरासत

भेड़ कोथिक महज एक मेला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है। 18 साल बाद मेले के आयोजन ने क्षेत्र की पुरानी लोक विरासत को फिर से जीवंत कर दिया।

 

खास बात यह रही कि मेले में बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी शामिल हुए। इससे यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बना।


 

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