“कॉकरोच जनता पार्टी” बनी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय, बेरोजगारी और सिस्टम पर व्यंग्य के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश
दिल्ली: देश की राजनीति और सोशल मीडिया में इन दिनों एक अनोखा नाम तेजी से वायरल हो रहा है — ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)। यह कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि बेरोजगारी, व्यवस्था से नाराजगी और राजनीतिक व्यंग्य को लेकर शुरू हुआ एक सोशल मीडिया आधारित सटैरिकल मूवमेंट है, जिसने युवाओं के बीच नई बहस छेड़ दी है।
पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई युवाओं ने इसे बेरोजगारों और संघर्ष कर रहे लोगों से जोड़कर देखा। हालांकि बाद में CJI ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री और गलत तरीकों से पेशों में प्रवेश करने वालों के संदर्भ में थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से फैल गया।
इसी बीच 16 मई को अभिजीत डिपके नाम के युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों से “कॉकरोच जनता पार्टी” से जुड़ने की अपील की। अभिजीत फिलहाल अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं और पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से भी जुड़े रहे हैं।
अभिजीत के मुताबिक CJP उन लाखों युवाओं की आवाज है, जो खुद को व्यवस्था से ठगा हुआ महसूस करते हैं। पार्टी की सबसे ज्यादा चर्चा उसकी टैगलाइन को लेकर हो रही है —
“आलसी और बेरोजगारों की आवाज।”
सदस्यता के लिए भी पार्टी ने व्यंग्यात्मक शर्तें रखी हैं, जिनमें बेरोजगार होना, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना और सिस्टम पर तंज कसने की क्षमता शामिल है। यही कारण है कि यह पहल इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है।
पार्टी के कथित घोषणापत्र में कई ऐसे मुद्दे शामिल किए गए हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया है। इनमें रिटायर CJI को राज्यसभा न भेजने की मांग, महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, दलबदल करने वाले नेताओं पर 20 साल की पाबंदी और बड़े कॉर्पोरेट मीडिया चैनलों की जांच जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
अभिजीत डिपके का दावा है कि कुछ ही दिनों में हजारों युवा इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उनका कहना है कि “कॉकरोच” सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, जिद और मुश्किल हालात में भी टिके रहने की मानसिकता का प्रतीक है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल यह एक गंभीर राजनीतिक दल से ज्यादा सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक आंदोलन नजर आता है। बावजूद इसके, बेरोजगारी और युवाओं की नाराजगी जैसे मुद्दों को जिस तरह यह अभियान उठा रहा है, उसने इसे राष्ट्रीय चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।