मानसून पर मंडरा रहा है अल नीनो का असर! 2026 में सामान्य से कम बारिश की आशंका, किसानों की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इसी बीच मौसम को लेकर जारी पूर्वानुमानों ने चिंता बढ़ा दी है। अनुमान जताया जा रहा है कि वर्ष 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियां वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकती हैं। यदि यह प्रभाव मजबूत होता है, तो भारत में मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ अंतरराष्ट्रीय मौसम विशेषज्ञ इसे अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो बनने की आशंका भी जता रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के लिए मानसून का अनुमान लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत के आसपास रहने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह हाल के वर्षों के अपेक्षाकृत कमजोर मानसूनों में शामिल हो सकता है। हालांकि, अंतिम स्थिति मानसून की प्रगति और मौसम प्रणालियों के विकास पर निर्भर करेगी।
इतिहास बताता है कि वर्ष 2015 में देश में मानसून काफी कमजोर रहा था, जब जून से सितंबर के दौरान कुल वर्षा सामान्य से काफी कम दर्ज की गई थी। लगातार कम बारिश का सीधा असर खेती, जल भंडारण और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लगभग 60 प्रतिशत किसान खरीफ फसलों के लिए मानसूनी वर्षा पर निर्भर हैं। यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो धान, दालें और अन्य फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे बाजार में महंगाई बढ़ने की आशंका भी रहती है।
फिलहाल देशभर के किसान और आम नागरिक अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं, जबकि मौसम विभाग और वैज्ञानिक अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।