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धुमाकोट महाकौथिग में युवाओं ने पेश की स्वरोजगार की मिसाल, ‘पहाड़ी भुला’ स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

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By Pahadnews24
June 8, 2026 • 1 min read
धुमाकोट महाकौथिग में युवाओं ने पेश की स्वरोजगार की मिसाल, ‘पहाड़ी भुला’ स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र
धुमाकोट महाकौथिग में युवाओं ने पेश की स्वरोजगार की मिसाल, ‘पहाड़ी भुला’ स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र (Photo: Pahad News)

धूमाकोट। धूमाकोट महाकौथिग सीजन-5 में जहां एक ओर लोक संस्कृति और लोक संगीत की रंगत देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के युवाओं ने स्वरोजगार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की एक प्रेरणादायक तस्वीर भी प्रस्तुत की। महाकौथिग में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों के बीच ‘पहाड़ी भुला’ नामक स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।


 

इस स्टॉल का संचालन क्षेत्र के तीन युवा आयुष रावत, विनोद रावत और दिव्यांशु मढ़वाल द्वारा किया गया। स्टॉल में पहाड़ी संस्कृति से प्रेरित टी-शर्ट, की-चेन, पहाड़ी स्लोगन वाले स्टिकर, हस्तनिर्मित साबुन के साथ-साथ चीड़ के पिरुल (सूखी पत्तियों) से बने विभिन्न उत्पाद भी प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखे गए थे। पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने वाले इन उत्पादों को लोगों ने काफी सराहा और युवाओं के इस नवाचार की प्रशंसा की।


 

पहाड़ न्यूज़ 24 से विशेष बातचीत में आयुष रावत ने कहा कि वह उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से स्वरोजगार तथा रिवर्स पलायन की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम अक्सर रोजगार और रिवर्स पलायन की चर्चा करते हैं, लेकिन यह तभी संभव होगा जब हम इसकी शुरुआत स्वयं से करें। युवाओं को यह दिखाना जरूरी है कि पहाड़ में भी अवसर पैदा किए जा सकते हैं। जरूरत सिर्फ सोच को कार्य में बदलने की है। यदि हम खुद पहल करेंगे तो दूसरे युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि पहाड़ में रहकर भी रोजगार के नए मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।”


 

विनोद रावत ने कहा कि पहाड़ की संस्कृति, पहचान और स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पिरुल से बने उत्पादों को लोगों से अच्छा प्रतिसाद मिला, जिससे यह साबित होता है कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

 

 

वहीं दिव्यांशु मढ़वाल ने कहा कि ‘पहाड़ी भुला’ केवल एक स्टॉल नहीं, बल्कि एक विचार है, जो युवाओं को अपनी जड़ों, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि यदि युवा नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें तो पलायन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


 

महाकौथिग में ‘पहाड़ी भुला’ की पहल ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला भी बन सकता है। स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार को एक साथ जोड़ने वाला यह प्रयास मेले में चर्चा का विषय बना रहा और कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी साबित हुआ।


 

— पहाड़ न्यूज़ 24


 

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