2027 चुनाव से पहले फिर सक्रिय हुआ उक्रांद, क्या पहाड़ की राजनीति में बनेगा नया समीकरण?
देहरादून | 11 मई 2026
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर क्षेत्रीय मुद्दों की चर्चा तेज होने लगी है। राज्य आंदोलन से जुड़ा रहा उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गांव-गांव तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा दिखाई दे रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि पार्टी जमीनी मुद्दों पर लगातार सक्रिय रही, तो आने वाले चुनाव में राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती बन सकती है।
हाल के महीनों में उक्रांद ने बेरोजगारी, पलायन, मूल निवास, भू-कानून और पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर कई जिलों में संवाद कार्यक्रम और यात्राएं शुरू की हैं। सोशल मीडिया पर भी पार्टी की सक्रियता बढ़ी है, जिससे युवाओं के बीच चर्चा तेज हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तराखंड बनने के आंदोलन में क्षेत्रीय दलों की बड़ी भूमिका रही थी, लेकिन समय के साथ राष्ट्रीय पार्टियों का प्रभाव बढ़ता गया। अब एक बार फिर पहाड़ के स्थानीय मुद्दे राजनीतिक केंद्र में लौटते दिख रहे हैं।
उक्रांद से हाल में कई शिक्षाविद, पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं के जुड़ने की चर्चाएं भी तेज हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में संगठन को और मजबूत किया जाएगा और प्रदेश की सभी सीटों पर तैयारी की जा रही है।
हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि क्षेत्रीय दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक मजबूती और लगातार जनसंपर्क बनाए रखना होगी। उत्तराखंड की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द रही है, लेकिन पहाड़ के कई इलाकों में स्थानीय मुद्दों को लेकर नाराज़गी भी देखने को मिल रही है।
अब सवाल यही है —
क्या 2027 में उत्तराखंड की राजनीति में तीसरा विकल्प मजबूत होगा, या फिर चुनाव पुराने समीकरणों के बीच ही सिमट जाएगा?