🚨 BREAKING NEWS
Advertisement

🎯 Advertise Here!

Click to partner with us and reach our growing Uttarakhand audience.

Homeराजनीति‘कुर्सी’ की वापसी से पहाड़ में गरमाई राज...

‘कुर्सी’ की वापसी से पहाड़ में गरमाई राजनीति, सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा UKD

V
By Vinod Rawat
May 12, 2026 • 1 min read
‘कुर्सी’ की वापसी से पहाड़ में गरमाई राजनीति, सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा UKD
‘कुर्सी’ की वापसी से पहाड़ में गरमाई राजनीति, सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा UKD (Photo: Pahad News)

देहरादून, 12 मई 2026:

उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह “कुर्सी” को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) को फिर से “कुर्सी” चुनाव चिन्ह मिलने की खबर से कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है।

 

पार्टी नेताओं ने इसे उत्तराखंड आंदोलन की विचारधारा और जनता के विश्वास की जीत बताया है। UKD कार्यकर्ताओं का कहना है कि “कुर्सी” केवल एक चुनाव चिन्ह नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, संघर्ष और क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक रही है।

 

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब संगठन को और मजबूती के साथ गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। आगामी चुनावों को देखते हुए इस फैसले को UKD के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त माना जा रहा है।

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि “कुर्सी” चिन्ह केवल एक चुनाव निशान नहीं, बल्कि उत्तराखंड आंदोलन की पहचान और भावनाओं से जुड़ा प्रतीक रहा है। यही कारण है कि यह खबर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।

 

युवाओं के बीच भी यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब क्षेत्रीय राजनीति फिर से मजबूत होगी? क्या पलायन, बेरोजगारी और पहाड़ के मुद्दों को नई आवाज मिलेगी?

 

UKD कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह सिर्फ चुनाव चिन्ह की वापसी नहीं, बल्कि उन सपनों की वापसी है जो अलग उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समय देखे गए थे।

अब आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि “कुर्सी” की वापसी उत्तराखंड की राजनीति में कितना बड़ा असर डालती है।

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी जमीनी मुद्दों — जैसे पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा — पर मजबूती से काम करती है, तो क्षेत्रीय राजनीति में फिर से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकती है।

 

“जय पहाड़, जय उत्तराखंड” के नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर खुशी भी जताई।

राजनीति UTTARAKHAND